युक्ति
-- अरुण प्रदीप
हमारे एक स्वघोषित कवि मित्र ने
छपास रोग निर्मूलन के लिये
अनूठा नुस्खा अपनाया ;
पत्रिका संपादक को
भेजते समय रचना
साथ में येह पत्र लगाया -
" पत्रिका की बिक्री यदि
बढ़ाना चाहें ,
तो संलग्न कविता
पत्रिका में छपवायें ,
तत्पश्चात प्रति अंक
पचास प्रतियाँ वी.पी .पी.
मुझे कराते जाएं !
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